ख्वाहिशें होश खोये जाती हैं/
दर्द के बीज बोये जाती हैं /
कैसा नशा है सुर्ख फूलों में ,
तितलियाँ उन पे सोये जाती हैं/
चूड़ियाँ भूले बिसरे बचपन की,
कैसी टीसें चुभोये जाती हैं/
धुप से मैंने भर दिया आँगन
बारिशें फिर भी होए जाती हैं/
मेरे 'नैना' को हसरतें मेरी
आंसुओं में दुबोये जाती हैं/
Labels: फरजाना नैना
है ज़रा सा सफर गुज़ारा कर /
चंद लम्हे फ़क़त गवारा कर /
धुप में नज्म बादलों पे लिख
कोई परछाई इस्त'आरा कर /
छुई मुई की एक पत्ती हूँ
दूर ही से मेरा नज़ारा कर /
आसमानों से रोशनी जैसा,
मुझ पे इलहाम एक सितारा कर /
पहले देखा था जिस मुहब्बत से,
इक नज़र फिर वही दुबारा कर/
खो न जाए गुबार में 'नैना'
मुझ को ए ज़िन्दगी पुकारा कर /
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