Counter Stats

Wednesday, February 13, 2008

 

मैं सियासत में चला जाऊं तो नंगा हो जाऊं

मेरी ख़्वाहिश है कि फिर से मैं फ़रिश्ता हो जाऊं
माँ से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊं
कम-से कम बच्चों के होठों की हंसी की ख़ातिर
ऎसी मिट्टी में मिलाना कि खिलौना हो जाऊं
सोचता हूं तो छलक उठती हैं मेरी आँखें
तेरे बारे में न सॊचूं तो अकेला हो जाऊं
चारागर तेरी महारथ पे यक़ीं है लेकिन
क्या ज़ुरूरी है कि हर बार मैं अच्छा हो जाऊं
बेसबब इश्क़ में मरना मुझे मंज़ूर नहीं
शमा तो चाह रही है कि पतंगा हो जाऊं
शायरी कुछ भी हो रुसवा नहीं होने देती
मैं सियासत में चला जाऊं तो नंगा हो जाऊं
"http://hi.literature.wikia.com/से लिया गया

Labels:


This page is powered by Blogger. Isn't yours?

Subscribe to Posts [Atom]

Adeeb

रूहेलखंड और बरेली के मशहूर शायरों और कवियों के चुनिंदा कलाम यहाँ पढें

नूरी किरण जूनियर बरेली

फोर्थ डायमेंशन
बरेली टीन वर्ल्ड

अदीब